आम आदमी पार्टी के विधायक नरेश बल्याण को महाराष्ट्र नियंत्रण ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट (MCOCA) के तहत गिरफ्तार किया गया और 10 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।

Extortion Case on  AAP MLA Naresh Balyan: पिछले हफ्ते, आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक नरेश बाल्यान को महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) के तहत गिरफ्तार किया गया और उन्हें 10 दिनों की पुलिस हिरासत में भेजा गया। पुलिस ने आरोप लगाया है कि बाल्यान का नाम गैंगस्टर कपिल सांगवान द्वारा एक व्यापारी से वसूली की मांग में मध्यस्थ के रूप में सामने आया। कपिल सांगवान, जो कथित तौर पर यूके से संगठित अपराध चला रहा है, पर भी इस साल MCOCA लगाया गया था। आइए जानते हैं आखिर क्या है MCOCA अधिनियम, जिसके तहत  बाल्यान को गिरफ्तार किया गया है।

MCOCA क्या है और इसे दिल्ली में कैसे लागू किया गया?

1999 में महाराष्ट्र में शिवसेना-बीजेपी गठबंधन सरकार द्वारा यह कानून बनाया गया था। इसका मकसद मुंबई में संगठित अपराध और अंडरवर्ल्ड पर लगाम लगाना था। यह भारत का पहला राज्य-स्तरीय कानून है, जो संगठित अपराध को संबोधित करता है। दिल्ली में, जो केंद्र सरकार के अधीन आती है, 2002 में MCOCA को अपनाया गया। इस कानून का उपयोग दिल्ली में संगठित अपराध से निपटने के लिए किया जाता है।  

MCOCA की परिभाषा और प्रावधान

MCOCA के तहत 'संगठित अपराध' को किसी व्यक्ति या गिरोह द्वारा हिंसा, धमकी, डराने-धमकाने या अवैध गतिविधियों के माध्यम से आर्थिक या अन्य लाभ प्राप्त करने के मकसद से की गई निरंतर अवैध गतिविधियों के तौर पर परिभाषित किया गया है। इसके तहत किसी व्यक्ति पर मामला तभी दर्ज किया जा सकता है, जब पिछले 10 सालों में उसके खिलाफ दो या अधिक चार्जशीट दाखिल की गई हों। इसमें संगठित अपराध को बढ़ावा देना, अपराध छिपाना या गिरोह द्वारा अर्जित संपत्ति को छिपाने जैसे काम भी शामिल हैं।  

MCOCA का एक खास प्रावधान यह है कि पुलिस हिरासत में दिए गए, कुछ इकबालिया बयान अदालत में स्वीकार्य होते हैं।  

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कुछ अन्य कड़े कानून और उनका प्रभाव
  
भारत में आतंकवाद और संगठित अपराध से निपटने के लिए कई कड़े कानून बनाए गए हैं।  

  1. TADA (1987): आतंकवादी और विघटनकारी गतिविधियों से निपटने के लिए बनाया गया था लेकिन 1995 में इसके दुरुपयोग के कारण इसे रद्द कर दिया गया।  
  2. POTA (2002): संसद हमले और IC-814 हाईजैक के बाद लाया गया, लेकिन 2004 में इसे भी समाप्त कर दिया गया।  
  3. UAPA (1967): यह कानून वर्तमान में आतंकवाद से निपटने के लिए लागू किया जाता है।  

TADA, POTA, और MCOCA के तहत पुलिस हिरासत में दिए गए इकबालिया बयान को सबूत के तौर पर स्वीकार किया जा सकता है।  

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MCOCA के इस्तेमाल को लेकर विवाद

AAP विधायक नरेश बाल्यान पर इस कानून का इस्तेमाल करने को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि महाराष्ट्र का यह कानून दिल्ली में कैसे लागू हुआ। इसके अलावा, MCOCA के तहत आरोप लगाना यह संकेत देता है कि मामला संगठित अपराध और राजनीतिक प्रभाव से जुड़ा हो सकता है। दिल्ली में MCOCA का इस्तेमाल पहले भी संगठित अपराध से निपटने के लिए किया गया है। हालांकि, इस कानून की सख्त प्रकृति के कारण इसे लागू करने के फैसले अक्सर विवादों की वजह बनते हैं।  इस मामले में AAP और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो सकता है। अब यह देखना होगा कि नरेश बाल्यान के खिलाफ मामले में अदालत का रुख क्या रहता है।