09 Jan 2024
अयोध्या में राम मंदिर की तैयारियां जोरों पर है। 22 जनवरी को दुनियाभर में लोगों को बेसब्री से इंतजार है। प्राण प्रतिष्ठा को लेकर देशभर में हर्षोउल्लाष का माहौल है। लेकिन इन सबके इतर जेहन में एक ही सवाल है कि कैसा है राम मंदिर, क्या खास होगा? क्या आकर्षण का केंद्र होगा? आइए जानते हैं-
रामलला के मंदिर को परम्परागत नागर शैली में बनाया गया है।
मंदिर की लंबाई (पूर्व से पश्चिम) 380 फीट, चौड़ाई 250 फीट तथा ऊंचाई 161 फीट है।
मंदिर तीन मंजिला रहेगा। प्रत्येक मंजिल की ऊंचाई 20 फीट है। मंदिर में कुल 392 खंभे व 44 द्वार बनाए गए हैं।
मुख्य गर्भगृह में प्रभु श्रीराम का बालरूप तथा प्रथम तल पर श्रीराम दरबार है।
मंदिर में नृत्य मंडप, रंग मंडप, सभा मंडप, प्रार्थना मंडप व कीर्तन मंडप मौजूद हैं।
मंदिर के खंभों व दीवारों में देवी देवता तथा देवांगनाओं की मूर्तियां बनाई गई हैं।
मंदिर में प्रवेश के लिए पूर्व दिशा से 32 सीढ़ियां चढ़कर सिंहद्वार बनाया गया है।
दिव्यांगजन एवं वृद्धों के लिए मंदिर में रैम्प व लिफ्ट की व्यवस्था की गई है।
मंदिर के चारों ओर चारों ओर आयताकार परकोटा बनाया गया है जिसके चारों दिशाओं में इसकी कुल लंबाई 732 मीटर तथा चौड़ाई 14 फीट है।
परकोटा के चारों कोनों पर सूर्यदेव, मां भगवती, गणपति व भगवान शिव को समर्पित चार मंदिरों का निर्माण किया गया है।
उत्तरी भुजा में मां अन्नपूर्णा, व दक्षिणी भुजा में हनुमान जी का मंदिर बनाया गया है।
मंदिर के समीप पौराणिक काल का सीताकूप विद्यमान है।
मंदिर परिसर में प्रस्तावित अन्य मंदिर- महर्षि वाल्मीकि, महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य, निषादराज, माता शबरी व ऋषिपत्नी देवी अहिल्या को समर्पित हैं।
दक्षिण पश्चिमी भाग में नवरत्न कुबेर टीला पर भगवान शिव के प्राचीन मंदिर का जीर्णोद्धार किया गया है एवं वहां जटायु की भी प्रतिमा बनाई गई है।
मंदिर में लोहे का प्रयोग बिल्कुल नहीं किया गया है। इसके अलावा धरती के ऊपर बिलकुल भी कंक्रीट नहीं है।
25 हजार क्षमता वाले एक दर्शनार्थी सुविधा केंद्र (Pilgrims Facility Centre) का निर्माण किया गया है, जहां दर्शनार्थियों का सामान रखने के लिए लॉकर व चिकित्सा की सुविधा प्राप्त होगी।
मंदिर परिसर में स्नानागार, शौचालय, वॉश बेसिन, ओपन टैप्स आदि की सुविधा दी गई है।
मंदिर का निर्माण पूर्णतया भारतीय परम्परानुसार व स्वदेशी तकनीक से किया गया है। मंदिर परिसर के कुल 70 एकड़ क्षेत्र में 70% क्षेत्र सदैव हरा भरा रहेगा।